Dec 17, 2021

                  राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस


पूरे भारत में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस लोगों द्वारा हर साल 14 दिसम्बर को मनाया जाता है। भारत में ऊर्जा संरक्षण अधिनियम वर्ष 2001 में ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) द्वारा निष्पादित (स्थापित) किया गया। ऊर्जा दक्षता ब्यूरों एक संवैधानिक निकाय है जो भारत सरकार के अंतर्गत आता है और ऊर्जा का उपयोग कम करने के लिए नीतियों और रणनीतियों के विकास में मदद करता है।

भारत में ऊर्जा संरक्षण अधिनियम का उद्देश्य पेशेवर, योग्य और ऊर्जावान प्रबंधकों के साथ ही लेखा परीक्षकों को नियुक्त करना है जो ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं को लागू करने और ऊर्जा, परियोजनाओं, नीति विश्लेषण, वित्त प्रबंधन में विशेषज्ञ हों।


The theme for this year is ‘Azadi ka Amrit Mahotsav: Energy Efficient India” and ‘Azadi ka Amrit Mahotsav: Cleaner Planet’.

ऊर्जा संरक्षण क्या है?

भारत में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस लोगों को ऊर्जा के महत्व के साथ ही साथ बचत, और ऊर्जा की बचत के माध्यम से संरक्षण बारे में जागरुक करना है। ऊर्जा संरक्षण का सही अर्थ है ऊर्जा के अनावश्यक उपयोग को कम करके कम ऊर्जा का उपयोग कर ऊर्जा की बचत करना है। कुशलता से ऊर्जा का उपयोग भविष्य में उपयोग के लिए इसे बचाने के लिए बहुत आवश्यक है। ऊर्जा संरक्षण की योजना की दिशा में अधिक प्रभावशाली परिणाम प्राप्त करने के लिए हर इंसान के व्यवहार में ऊर्जा संरक्षण निहित होना चाहिए।

ऊर्जा संरक्षण के क्या उपाय हैं?

  • थर्मल पर्दें, स्मार्ट खिड़कियों के अलावा खिड़कियाँ ऊर्जा का संरक्षण करने में सबसे बड़ा कारक है।
  • ऊर्जा की एक बड़ी मात्रा को प्राकृतिक रोशनी और कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लैंप या सीएफएल से (15W और अन्य साधनों के द्वारा ऊर्जा खपत का केवल 1/4वां भाग की खपत), फ्लोरोसेंट बल्ब, रैखिक फ्लोरोसेंट, सौर स्मार्ट टॉर्च, स्काई लाइट, खिड़कियों से प्रकाश व्यवस्था और सौर लाइट का प्रयोग करके बचाया जा सकता है।
  • जल संरक्षण भी बेहतर ऊर्जा संरक्षण का नेतृत्व करता है। लोगों के द्वारा हर साल लगभग हजारों गैलन पानी बर्बाद किया जाता है जिसकी विभिन्न संरक्षण के साधनों जैसे: 6 जीपीएम या कम से कम प्रवाह वाले फव्वारों, बहुत कम फ्लश वाले शौचालय, नल जलवाहक, खाद शौचालयों का प्रयोग करके बचत की जा सकती है।
  • पृथक्करण सर्दी के मौसम में थर्मल को कम करने के साथ ही गर्मियों में थर्मल प्राप्त करके भी ऊर्जा के संरक्षण में बहुत अहम भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिये, प्राकृतिक ऊन पृथक्करण, घर पृथक्करण, कपास पृथक्करण, रेशा पृथक्करण, थर्मल पृथक्करण आदि।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस का उद्देश्य

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस हर साल एक विशेष विषय के साथ कुछ लक्ष्यों और उद्देश्यों को ध्यान में रखकर लोगों के बीच अधिक प्रभावशाली बनाने के लिये मनाया जाता है।

  • यह लोगों के बीच जीवन के हर क्षेत्र में ऊर्जा संरक्षण के महत्व का संदेश भेजने के लिए मनाया जाता है।
  • ऊर्जा संरक्षण की प्रक्रिया को बढावा देने के लिये पूरे देश में बहुत से कार्यक्रमों जैसे: विचार विमर्श, सम्मेलनों, वाद-विवाद, कार्यशालाओं, प्रतियोगिताओं का आयोजन करना।
  • अत्यधिक और फालतू ऊर्जा के उपयोग के स्थान पर कम ऊर्जा के प्रयोग के लिये लोगों को प्रोत्साहित करना।
  • ऊर्जा की खपत में कमी और कुशलता पूर्वक उपयोग करने के लिये लोगों को प्रोत्साहित करना।

ऊर्जा सुरक्षा में भारतीय नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका

भारत के सभी और प्रत्येक नागरिक कुशलतापूर्वक ऊर्जा के उपयोग और भविष्य के लिये ऊर्जा की बचत के बहुत से तरीकों के बारे में जानते हैं। वो सभी नियमों, विनियमों और ऊर्जा दक्षता का समर्थन करने के लिये भारत सरकार द्वारा लागू की गई नीतियों का पालन करते हैं। भारत के नागरिक 11वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान ऊर्जा के उपयोग को कम करने के अभियान में प्रत्यक्ष अंशदान का भुगतान कर रहे हैं। देश में सकारात्मक बदलाव लाने और आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिये बच्चे बहुत बड़ी उम्मीद हैं।


"Earth provides enough to satisfy every man's needs, but not every man's greed." 

by Mahatma Gandhi

                           मानवाधिकार दिवस


हर साल दिसंबर महीने की 10 तारीख को दुनियाभर में मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। लोगों का ध्यान मानवाधिकारों की तरफ आकर्षित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने 1950 में 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस के रूप में घोषित किया था।  तब से लेकर आज भी पीछले 70 सालो से यह दिन 10 दिसंबर को मनाया जाता है  इसका उद्देश्य दुनियाभर के लोगों को मानवाधिकारों के महत्व के प्रति जागरूक करना है। 1948 में यूएन ने मानव अधिकारों की सर्वभौमिक घोषणा की जो 500 से ज्यादा भाषाओं में उपलब्ध हैं।


The theme of Human Rights Day 2021 

"Equality, Reducing inequalities, advancing human rights."

इस साल मानवाधिकार दिवस का विषय 'असमानताओं को कम करना, मानवाधिकारों को आगे बढ़ाना'' है। यह विषय कोरोना महामारी के मद्देनजर रखा गया है। इस मौके पर यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने एक वीडियो संदेश जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि कोरोना महामारी का मुकाबला करने के लिए प्रयासों, लैंगिक समानता, जनभागीदारी, जलवायु न्याय और टिकाऊ विकास में- मानवाधिकारों को केंद्रीय महत्व देने की आवश्यकता है।

ये है मानवाधिकार दिवस का उद्देश्य (Purpose of Human Rights Day)

मानवाधिकार दिवस का उद्देश्य दुनिया का ध्यान मानवों के अधिकारों की ओर ध्यान आकर्षित कराना है. इस दिन विश्वभर के लोगों को मानवाधिकारों के महत्व के प्रति जागरूक करना और इसके पालन के प्रति सजग रहने का संदेश दिया जाता है. इस उद्देश्य है संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने 10 दिसंबर, 1950 में इस दिन की घोषणा की थी. इतना ही नहीं तब मानव अधिकारों की जो घोषणा की गई थी, वो 500 से ज्यादा भाषाओं में उपलब्ध है. मानवाधिकार दिवस के मौके पर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने कहा है कि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए हमें एकजुट कोशिश करनी होगी, लैंगिक समानता, जनभागीदारी की जरूरत होगी. इसके साथ ही जलवायु, और लम्बे समय तक चलने वाला टिकाई विकास करना होगा, जिसमें मानवाधिकार का महत्व भी हो.

मानवाधिकार मानदंडों का एक सेट माना जाता है जो मानव व्यवहार के कुछ मानकों को चित्रित करते हैं। मानवाधिकार मूल रूप से उन अधिकारों के अधिकार हैं जो प्रत्येक व्यक्ति के पास इंसान होने के कारण होते हैं। यह कहा जाता है कि ये हर जगह और हर समय लागू होते हैं। ये नगरपालिका से अंतरराष्ट्रीय कानून तक के कानूनी अधिकारों के रूप में संरक्षित हैं। मानवाधिकार सार्वभौमिक हैं।

                                            भारत में संविधान दिवस


भारत में 26 नवम्बर को हर साल संविधान दिवस मनाया जाता है, क्योंकि वर्ष 1949 में 26 नवम्बर को संविधान सभा द्वारा भारत के संविधान को स्वीकृत किया गया था जो 26 जनवरी 1950 को प्रभाव में आया। डॉ. भीमराव अम्बेडकर को भारत के संविधान का जनक कहा जाता है।



भारत की आजादी के बाद काग्रेस सरकार ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर को भारत के प्रथम कानून मंत्री के रुप में सेवा करने का निमंत्रण दिया। उन्हें 29 अगस्त को संविधान की प्रारुप समिति का अध्यक्ष बनाया गया। वह भारतीय संविधान के मुख्य वास्तुकार थे और उन्हें मजबूत और एकजुट भारत के लिए जाना जाता है।

भारतीय संविधान का पहला वर्णन ग्रानविले ऑस्टिन ने सामाजिक क्रांति को प्राप्त करने के लिये बताया था। भारतीय संविधान के प्रति बाबा साहेब अम्बेडकर का स्थायी योगदान भारत के सभी नागरिकों के लिए एक बहुत मददगार है। भारतीय संविधान देश को एक स्वतंत्र कम्युनिस्ट, धर्मनिरपेक्ष स्वायत्त और गणतंत्र भारतीय नागरिकों को सुरक्षित करने के लिए, न्याय, समानता, स्वतंत्रता और संघ के रूप में गठन करने के लिए अपनाया गया था।

जब भारत के संविधान को अपनाया गया था तब भारत के नागरिकों ने शांति, शिष्टता और प्रगति के साथ एक नए संवैधानिक, वैज्ञानिक, स्वराज्य और आधुनिक भारत में प्रवेश किया था। भारत का संविधान पूरी दुनिया में बहुत अनोखा है और संविधान सभा द्वारा पारित करने में लगभग 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय ले लिया गया।

हम संविधान दिवस को क्यों मनाते है

भारत में संविधान दिवस 26 नवंबर को हर साल सरकारी तौर पर मनाया जाने वाला कार्यक्रम है जो संविधान के जनक डॉ भीमराव रामजी अम्बेडकर को याद और सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है। भारत के लोग अपना संविधान शुरू करने के बाद अपना इतिहास, स्वतंत्रता, स्वतंत्रता और शांति का जश्न मनाते है।

संविधान दिवस भारत के संविधान के महत्व को समझाने के लिए प्रत्येक वर्ष 26 नवंबर के दिन मनाया जाता है। जिसमें लोगो को यह समझाया जाता है कि आखिर कैसे हमारा संविधान हमारे देश के तरक्की के लिए महत्वपूर्ण है तथा डॉ अंबेडकर को हमारे देश के संविधान निर्माण में किन-किन कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।

आजादी के पहले तक भारत में रियासतों के अपने अलग-अलग नियम कानून थे, जिन्हें देश के राजनितिक नियम, कानून और प्रक्रिया के अंतर्गत लाने की आवश्यकता थी। इसके अलावा हमारे देश को एक ऐसे संविधान की आवश्कता थी। जिसमें देश में रहने वाले लोगों के मूल अधिकार, कर्तव्यों को निर्धारित किया गया हो ताकि हमारा देश तेजी से तरक्की कर सके और नयी उचाइयों को प्राप्त कर सके। भारत की संविधान सभा ने 26 जनवरी 1949 को भारत के संविधान को अपनाया और इसके प्रभावीकरण की शुरुआत 26 जनवरी 1950 से हुई।

भारत में संविधान दिवस कैसे मनाया जाता है

संविधान दिवस वह दिन है, जब हमें अपने संविधान के विषय में और भी ज्यादे जानने का अवसर प्राप्त होता है। इस दिन सरकारी तथा नीजी संस्थानों में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किये जाते है। संविधान दिवस के दिन जो सबसे महत्वपूर्ण कार्य किया जाता है वह है लोगो को “भारत के संविधान के प्रस्तावना” की जानकारी देना, जिसके विषय में देशभर के विद्यालयों, कालेजों और कार्यलयों में समूहों द्वारा लोगो काफी आसान भाषा में समझाया जाता है।

इसके साथ ही विद्यालयों में कई तरह के प्रश्नोत्तर प्रतियोगिताएं, भाषण और निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती है, जो भारत के संविधान और डॉ भीमराव अंबेडकर के उपर केंद्रित होती हैं। इसके साथ ही इस दिन कई सारे व्याख्यानों और सेमिनारों का भी आयोजन किया जाता है, जिनमें हमारे संविधान के महत्वपूर्ण विषयों के बारे में समझाया जाता है। इसी तरह कई सारे विद्यालयों में छात्रों के लिए वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें छात्रों द्वारा कई सारे विषयों पर चर्चा की जाती है।

                                                     संयुक्त राष्ट्र दिवस


दूसरे वर्ल्ड वार के दौरान कई देश आपस में बुरी तरह से उलझे हुए थे. भीषण उन्माद के उस दौर में जरूरत महसूस की गई ऐसे संगठन की, जो देशों के बीच के विवादों का निपटारा कर सके. साथ ही मानवता से जुड़ी उन मुद्दों पर फैसला ले सके जिनपर कोई देश अकेला फैसला लेने के हक में नहीं है. दुनियाभर में सुरक्षा-शांति, जलवायु परिवर्तन, मानवाधिकार आतंकवाद, लैंगिक समानता जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए इस संगठन को बनाया गया था.  इस दिशा में किए गए प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र की स्थापना का विचार मूर्त रूप ले पाया। 




UN कैसे बना एक संगठन ?


अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलीन डी. रूजवेल्ट ने इस 'यूनाइटेड नेशंस' नाम का इस्तेमाल सबसे पहले 1 जनवरी 1942 को किया था. ये दौर था दूसरे वर्ल्ड वार का, इस दौरान 26 देशों के प्रतिनिधियों को शामिल कर यूनाइटेड नेशंस' के लिए एक घोषणापत्र तैयार किया गया था. साल 1945 में यूनाइटेड नेशंस चार्टर तैयार करने के लिए अमेरिका के सैन फ्रैंसिस्को में एक आयोजन हुई जिसमें दुनिया के 50 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. इस चार्टर पर 26 जून 1945 को दुनिया के 50 देशों ने हस्ताक्षर किया. पोलैंड इसका हिस्सा नहीं था लेकिन बाद में इस देश ने भी चार्टर पर हस्ताक्षर किया और संगठन के 51 शुरुआती सदस्यों में शामिल हुआ. 24 अक्टूबर को आधिकारिक तौर पर संगठन की स्थापना हुई. ऐसे में हर साल 24 अक्टूबर को 'यूनाइटेड नेशंस डे' के तौर पर मनाया जाता है. भारत इस संगठन की स्थापना के महज 6 दिन बाद यानी 30 अक्टूबर 1945 को इसका हिस्सा बना. पाकिस्तान ने करीब 2 साल बाद 30 सितंबर 1947 को UN की सदस्यता हासिल की.
  • फिलहाल, UN के सदस्य देशों की संख्या 193 है.
यूनाइटेड नेशंस के प्रमुख अंग (ORGANS)
  • महासभा (General Assembly)
  • सुरक्षा परिषद (Security Council)
  • आर्थिक और सामाजिक परिषद् (Economic and Social Council)
  • न्यास परिषद (Trusteeship Council)
  • अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice)
  • सचिवालय (Secretariat)

तपूर्ण संस्था का संस्थापक दस्तावेज है जो वैश्विक शांति और समानता के लिए काम कर रहा है। 

द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के तुरंत बाद संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हुई थी। यह भविष्य में युद्धों को रोकने के उद्देश्य से स्थापित किया गया। यह एक अंतरसरकारी संगठन है जिसकी प्राथमिक भूमिका विश्व शांति और सुरक्षा बनाए रखना है। पिछपरिषद (Security Council) और भारत

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलीन डी. रूजवेल्ट ने इस 'यूनाइटेड नेशंस' नाम का इस्तेमाल सबसे पहले 1 जनवरी 1942 को किया था. ये दौर था दूसरे वर्ल्ड वार का, इस दौरान 26 देशों के प्रतिनिधियों को शामिल कर यूनाइटेड नेशंस' के लिए एक घोषणापत्र तैयार किया गया था. 

साल 1945 में यूनाइटेड नेशंस चार्टर तैयार करने के लिए अमेरिका के सैन फ्रैंसिस्को में एक आयोजन हुई जिसमें दुनिया के 50 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र को तैयार किया गया और इसे 24 अक्तूबर 1945 को लागू किया गया। इस तरह 24 अक्तूबर को प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र दिवस की 75वीं वर्षगांठ है। इस उपलब्धि को मनाने के लिए सदस्य देशों ने 21 सितंबर को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया था, जहां उन्होंने बहुपक्षवाद के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। 

24 अक्तूबर को एक ऐतिहासिक दिन के रूप में देखा जाता है, जब दुनिया के कुछ सबसे बड़े देशों द्वारा घोषणापत्र के अनुसमर्थन के बाद संयुक्त राष्ट्र आधिकारिक रूप से अस्तित्व में आया। संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र इस महान गैर-पक्षपाले 75 सालों में दुनिया को तीसरे महायुद्ध से बचाकर इसने अपनी विश्वसनीयता साबित की है। 

संयुक्त राष्ट्र दिवस 2021 की 'थीम' क्या है?

Recovering better for an equitable and sustainable world

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने ‘संयुक्त राष्ट्र दिवस’ के अपने संदेश में कहा कि कोविड-19 से लेकर आपात जलवायु स्थिति तक दुनिया के सामने बड़ी चुनौतियां हैं, जिससे वैश्विक एकजुटता और सहयोग से ही निपटा जा सकता है। 

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा, हम बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। वैश्विक एकजुटता और सहयोग से ही हम इन चुनौतियों से निपट सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र की पहचान यही है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर सभी युद्ध रोके जाने की अपील की।  

UN के सुरक्षा परिषद की जिम्मेदारी है, दुनियाभर में शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर फैसला लेना और शांति स्थापित रखना. सुरक्षा परिषद के कुल 15 सदस्य होते हैं.

                                                 विश्व खाद्य दिवस 2021


वर्ल्ड फूड डे या विश्व खाद्य दिवस दुनियाभर के 150 देशों के द्वारा मिलकर मनाया जाता है. 1981 से यह दिन हर साल 16 अक्टूबर को मनाया जाता है. हर साल यह दिवस एक थीम के तहत मनाया जाता है भोजन को हर व्यक्ति का मौलिक और बुनियादी अधिकार मानते हुए हर व्यक्ति को भूख से बचाने के लिए यह दिन मनाया जाता है. साल 1945 में इसी दिन रोम में 'खाद्य एवं कृषि संगठन' (Food and Agriculture Organization, FAO) की स्थापना की गई थी. यह संगठन बदलती टेक्नोलॉजी के साथ कृषि, पर्यावरण, पोषक तत्व और खाद्य सुरक्षा के बारे में जानकारी देता है. ताकि पूरी दुनिया में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बढ़ाई जा सके और मालन्यूट्रिशन को रोका जा सके. साल 1979 में कांफ्रेंस ऑफ FAO ने वर्ल्ड फूड डे मनाने की घोषणा की थी. 



वर्ल्ड फूड डे मनाने का उद्देश्य है भुखमरी से पीड़ित लोगों को जागरूक करना. यह काम खाद्य और कृषि संगठन के सदस्यों ने इस दिन शुरू किया था. संगठन के 20वें महासम्मेलन में इस दिन के बारे में प्रस्ताव रखा गया था. इसके बाद साल 1981 में हर साल इसे मनाया जाता है. इसके अलावा, कई और ऑर्गेनाइजेशन जैसे International Fund For Agricultural Development, World Food Program भी लोगों के प्रति जागरूकता फैलाने का काम करते हैं. 

हमारे देश ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में कुपोषण (Malnutrition) के मामले बढ़ रहे हैं. इसलिए लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है. एक व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर खाना बहुत अहम है, लेकिन आज भी हजारों लोग कुपोषण की वजह से अपनी जान गवां रहे हैं. ऐसे में खाने को हर व्यक्ति का  मौलिक और बुनियादी अधिकार माना जाता है. इसलिए करीब 150 देश मिलकर यह दिवस मनाते हैं. 


हर साल हम अलग-अलग थीम पर विश्व खाद्य दिवस मनाते हैं. बता दें, इस साल इस दिवस की थीम है "हमारे कार्य हमारा भविष्य हैं- बेहतर उत्पादन, बेहतर पोषण, बेहतर वातावरण और बेहतर जीवन" (Our actions are our future- Better production, better nutrition, a better environment and a better life).

इस दिवस का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर फैल रही भूखमरी को जड़ से खत्म करना है. इस दिवस को हर साल नई-नई थीम के साथ मनाए जाने का प्रावधान है. खाद्य और कृषि संगठन अन्य खाद्य संगठनों की मदद से कई योजनाओं भी चलाई जा रही है.

विश्व खाद्य दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों का इसके प्रति जागरूक करना तथा विश्व में खराब हो रहे खाद्य पदार्थ को बचाना है। विश्व में किसी होटल, पार्टी या अन्य प्रोग्राम में बचे हुए खाना को किसी ऐसे एनजीओ (NGO) में दान करें जो भूखे लोगों का पेट भरते है।

                                  विश्व हस्त प्रक्षालन दिवस 2021


हर साल 15 अक्टूबर को ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे (Global Hand-washing Day 2021) मनाया जाता है. इस दिन का उद्देश्य सेहतमंद बने रहने के लिए दुनिया में हाथ धोने के महत्व को बताना है. हाथ धोना या हैंड हाइजीन काफी जरूरी है. क्योंकि जब आप हाथ धोते हैं, तो ना सिर्फ आपके हाथों से गंदगी, धूल-मिट्टी, तेल आदि साफ होते हैं, बल्कि बीमार करने वाले कई कीटाणुओं का भी नाश होता है. कोरोना के माहौल में हाथ धोना और भी जरूरी हो गया है.

हमारे जीवन में कई ऐसी चीजें होती हैं, जिन्हें करना हमारे लिए बेहद जरूरी होता है। नहीं तो हम कई बीमारियों की चपेट में तक आ सकते हैं। जैसे- हमारा हाथ धोना। कोरोना काल में तो ये और भी जरूरी हो गया था, ताकि हम वायरस के कहर से बचे रहें। हाथ धोना क्यों जरूरी है, और इसके फायदे और महत्व को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल 15 अक्टूबर को विश्वभर में 'ग्लोबल हैंड वॉशिंग डे' यानि विश्व हस्त प्रक्षालन दिवस मनाया जाता है। इस बात से इंकार नही किया जा सकता कि हाथ के जरिए ही हम कई बीमारियों का शिकार होते हैं। कोरोना वायरस के अलावा भी कई ऐसी बीमारियां हैं, जो हमें हाथों के जरिए ही शिकार बना लेती है। ऐसे में हाथ धोना कितना जरूरी हो जाता है, ये समझना हमारे लिए जरूरी है। तो चलिए आपको इस बारे में बताते हैं।

Theme of Global Hand-washing Day 2021 

Our Future is at Hand – Let's Move Forward Together.



इसलिए हाथ धोना जरूरी है

दरअसल, हाथ धोना बेहद जरूरी है।  अगर हाथों को न धोया जाए या ठीक तरह से न धोया जाए, तो व्यक्ति किसी वायरस या बैक्टीरिया के संपर्क में आ सकता है। इसके कारण हम बीमार हो सकते हैं। इसलिए अगर हाथों को साफ करके धोया जाए, तो हम कई बीमारियों से बचे रह सकते हैं।

हाथ धोने का ये है सही तरीका

हाथ धोना ही काफी नहीं है, बल्कि हाथो कों ठीक तरह से धोना जरूरी है। साबुन और पानी की मदद से हाथों को कम से कम 20 सेकंड तक धोना चाहिए। इसके बाद एक साफ कपड़े से हाथों को पोंछ लें। ऐसा करने से हाथों के जरिए फैलने वाली बीमारियों का खतरा लगभग न के बराबर हो जाता है। 

    (a)    सबसे पहले ठंडे या गुनगुने (ज्यादा गर्म नहीं) साफ पानी से हाथों को गीला कर लें.

    (b)    इसके बाद साबुन या लिक्विड सोप लेकर करीब 20 सेकेंड हाथों को रगड़ें और झाग बनाएं.

    (c)    साबुन को उंगलियों के बीच में, हाथ के पीछे, नाखूनों के पास, कलाई, अंगूठों, उंगलियों की टिप पर भी             रब करना ना भूलें.

    (d)    इसके बाद हाथों को साफ चलते पानी से धोकर तौलिये की मदद से सुखा लें.

इन चीजों के बाद हाथ जरूर धोएं

ये जानना भी जरूरी है कि हाथों को कब धोना चाहिए। दरअसल, खाना खाने से पहले और बाद में, टॉयलेट का इस्तेमाल करने के बाद, गमलों की सफाई करने के बाद, घर की सफाई करने के बाद, जानवरों को छूने के बाद हाथों को जरूर साफ करके धोना चाहिए।

हो सकती हैं ये बीमारियां

अगर हाथों को न धोया जाए, तो हम कई बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। इसमें कोरोना वायरस, पेट में कीड़े होना, हेपेटाइटिस ए, फूड प्वॉयजनिंग, हाथ, मुंह और पैरों से जुड़ी बीमरियां और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां शामिल है।


 

विश्व विद्यार्थी दिवस 2021


सन् 2010 में संयुक्त राष्ट्र ने प्रत्येक वर्ष 15 अक्टूबर के दिन भारत के पूर्व राष्ट्रपति अवुल पाकिर जैनअब्दुलीन अब्दुल कलाम (डॉ ए.पी.जे अब्दुल कलाम) के जन्म दिवस के दिन मनाने की घोषणा की, यह फैसला उनके द्वारा विज्ञान और तकनीक में गये योगदान को देखते हुए लिया गया। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम एक वैज्ञानिक तथा राजनेता होने के साथ ही एक उम्दा शिक्षक भी थे। यहीं कारण था कि अपने भाषणों द्वारा उन्होंने लाखो छात्रों प्रभावित किया।


डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सभी विद्यार्थियों के लिए एक आदर्श थे, तमिलानाडु के एक छोटे से गाँव से होते हुए भी वह अपने मेहनत और लगन के बलबूते पर देश के सबसे उंचे संवैधानिक पद पर पहुंचे। उनके इन्हीं उपलब्धियों के कारण उनके जन्मदिन को विश्व विद्यार्थी दिवस के रुप में मनाने की घोषणा की गई है।

विश्व विद्यार्थी दिवस क्यों मनाया जाता है?

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम सभी वर्गों और जाति के छात्रों के लिए एक प्रेरक और मार्गदर्शक की भूमिका निभाते थे। एक छात्र के रुप में उनका खुद का जीवन काफी चुनौतीपूर्ण था और अपने जीवन में उन्होंने कई तरह के कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना किया। इसके अलावा अपने बचपन में वह अपने परिवार और खुद के भरण-पोषण के लिए, वह दरवाजे-दरवाजे जाकर अखबार भी बेचा करते थे।

लेकिन अपनी पढ़ाई के प्रति अपनी दृढ़-इच्छा शक्ति के कारण वह अपने जीवन में हर तरह की बाधाओं को पार करने में सफल रहे और अपने जीवन में हर चुनौती को पार करते हुए, राष्ट्रपति जैसे भारत के सबसे बड़े संवैधानिक को प्राप्त किया। यह उनके जीवन की ऐसी कहानी है, जो उनके साथ-साथ भारत के आने वाले कई पीढ़ीयों को प्रेरित करने का कार्य करेगी।

अपने वैज्ञानिक और राजनैकित जीवन के दौरान भी डॉ ए.पी.जे अब्दुल कलाम ने खुद को एक शिक्षक ही माना और छात्रों को संबोधित करना ही उनका सबसे प्रिय कार्य था। फिर चाहे वह किसी गांव के छात्र हों या फिर किसी बड़े कालेज या विश्वविद्यालय के छात्र हों। शिक्षण के प्रति उनका कुछ ऐसा रुझान था कि एक समय उन्होंने अपने जीवन में भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के जैसा कैबिनेट श्रेणी का पद छोड़कर एक शिक्षक का पद चुन लिया।

अपने जीवन में डॉ कलाम ने छात्रों के कई सारे वैज्ञानिक, अकादमिक और आध्यात्मिक तरक्की पर ध्यान दिया। इस दौरान उन्होंने कई सारे भाषण दिये और किताबें लिखी तथा विश्व भर के छात्रों के तरक्की पर ध्यान दिया। उनके द्वारा वैज्ञानिक क्षेत्र और छात्रों के तरक्की के लिए किये गये इन्हीं अतुलनीय कार्यों देखते हुए उनके जन्म दिन को विश्व विद्यार्थी दिवस के रुप में मनाने का फैसला किया गया।

विश्व विद्यार्थी दिवस का महत्व

विश्व विद्यार्थी दिवस को मनाना हमारे लिए काफी महत्व की बात है क्योंकि इसके द्वारा हमें कई महत्वपूर्ण सीखें मिलती है। एक विद्यार्थी के लिए यह दिन और भी ज्यादे महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि डॉ ए.पी.जे अब्दुल कलाम का जीवन हमें इस बात की सीख देता है कि, जीवन में चाहे कितनी भी चुनौतियां क्यों ना हो लेकिन शिक्षा द्वारा हम हर बाधाओं को पार करते हुए बड़े से बड़े लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं।

निष्कर्ष

इसमें कोई संदेह नही है कि अब्दुल पाकिर जैनुलाब्दीन कलाम सच्चे मायनों में एक महानायक थे। जिस तरह की कठिनाइयां उन्होंने अपने बचपन में झेली, किसी और व्यक्ति को वह काफी आसानी से अपने रास्ते से डिगा सकती थी। पर डॉ अब्दुल कलाम इन सब कठिनाइयों का सामना शिक्षा के अस्त्र से किया और भारत के राष्ट्रपति जैसे सम्मानित पद को प्राप्त किया।

डॉ अब्दुल कलाम के विषय में की गई कोई चर्चा तब तक नही पूरी होगी जबतक उनके धर्म निरपेक्ष चरित्र की बात ना की जाये, जिसका उन्होंने सदैव अपने जीवन में पालन किया। वह एक साधरण, धर्म निरपेक्ष, शांत व्यक्ति थे और उनका व्यवहार बिल्कुल सामान्य व्यक्तियों के तरह ही था। इसके साथ ही देश के विज्ञान तथा रक्षा क्षेत्र में उनका दिया गया योगदान हम सबके लिए सदैव ही एक प्रेरक विषय रहेगा।

हमारी सबसे बढ़ी कमज़ोरी है की हम छोड़ देते हैं सफलता का एक रास्ता है की एक बार और प्रयास किया जाये |  Thomas  Edison थॉमस एडिसन

हमेशा  ध्यान  में  रखिये  की  आपका  सफल  होने  का  संकल्प  किसी  भी  और  संकल्प  से    महत्त्वपूर्ण है.  Abraham Lincoln अब्राहमलिंकन

तुम्हे सपने देखने होंगे, तभी तुम्हारे सपनें सच होंगे |

                                      विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2021

हर साल 10 अक्टूबर को पूरे विश्व में विश्व मानसिक स्वास्थ दिवस मनाया जाता है. यह दिवस इसलिए मनाया जाता है ताकि लोगों के बीच मानसिक स्वास्थ के मुद्दों के बारे में जागरुकता बढ़ सके और मानसिक स्वास्थ्य के सहयोगात्मक प्रयासों को संगठित करने के उद्देश्य से यह दिवस मनाया जाता है. इसकी शुरुआत विश्व मानसिक स्वास्थ्य संघ ने 10 अक्तूबर 1992 को की थी. 



विश्व स्वास्थ्य संगठन के पहले महानिदेशक ब्रॉक चिशहोम एक मनोरोग चिकित्सक थे। उनकी एक प्रसिद्ध उक्ति है- "बगैर मानसिक स्वास्थ्य के सच्चा शारीरिक स्वास्थ्य नहीं हो सकता है।" मानसिक तौर पर हमारी थकान हमें तनाव और चिंता की ओर धकेलती है और यही जब ज्यादा बढ़ जाए तो डिप्रेशन यानी अवसाद का रूप ले लेता है। शारीरिक परेशानियों की ओर तो हमारा ध्यान जाता है, लेकिन मानसिक परेशानियों को लेकर हमलोग बहुत जागरूक नहीं होते हैं। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से ही हर साल 10 अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।

शारीरिक बीमारी के बारे में तो हम सारी चीजें जानते हैं और साथ ही उसका इलाज भी मिल जाता है लेकिन आज की इस जिंदगी में मानसिक बीमारी एक बहुत बड़ी समस्या बनकर सामने आती है. दरअसल लोगों को मानसिक स्वास्थ्यके प्रति संवेदनशील और जागरूक करने के उद्देश्य से 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है.

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस का इतिहास

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पहली बार साल 1992 में संयुक्त राष्ट्र के उप महासचिव रिचर्ड हंटर और वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ की पहल पर मनाया गया था. इसके बाद साल 1994 में तत्कालीन संयुक्त राष्ट्र के महासचिव यूजीन ब्रॉडी के सुझाव के बाद विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस को एक थीम के साथ मनाने की शुरुआत की गई. सन् 1994 में पहली बार “दुनिया भर में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार।” नामक थीम के साथ विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया गया था. ऑस्ट्रेलिया समेत कुछ देशों में मानसिक रोगों से बचने और उनके नुकसान के बारे में जागरुकता फैलाने के लिए मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह भी मनाया जाता है

क्यों मनाया जाता है विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस

आज दुनिया में कई सारे लोग डिप्रेशन या फिर किसी ना किसी और मानसिक बीमारी के शिकार हैं. ये बीमारी आज के दौर में इतनी ज्यादा बढ़ गई है की हर दूसरा व्यक्ति इससे ग्रस्त है. लोगों को मानिसक रोग की चपेट में आने से कई बाहर आत्महत्या का ख्याल भी आता है. ऐसे में विश्व को मेंटल हेल्थ के प्रति जागरुक करने के उद्देश्य से ये दिन मनााया जाता है.

स्वास्थ्य दिवस 2021 की थीम

हर साल विश्व मानसिक स्वास्थ दिवस के लिए हर साल अलग-अलग थीम रखी जाती है, इस साल 'Mental Health in an Unequal World“एक असमान दुनिया मे मानसिक स्वास्थ्य” रखी गई है. इसी थीम पर पूरे विश्व में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.

सकारात्मक सोच है, तो मानसिक बीमारी दूर है
और जो शारीरिक-मानसिक रूप से स्वस्थ हैवो सुखी जरूर है

भारतीय वायुसेना दिवस 2021


Indian Air Force Day 2021 : देश में हर साल 8 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना दिवस (Indian Air Force Day) मनाया जाता है। आज भारतीय वायुसेना अपना 89 वां स्थापना दिवस मना रही है। वायुसेना दिवस के मौके पर शानदार परेड और भव्य एयर शो का आयोजन होता है। हर साल की तरह इस बार भी हिंडन बेस पर वायुसेना अपने शौर्य का प्रदर्शन करेगी। वायुसेना के एक से एक विमान और जवान हवा में हैरतअंगेज करतब दिखाते दिखेंगे। यहां जानें भारतीय वायुसेना दिवस के इतिहास और महत्व के बारे में - 


8 अक्टूबर 1932 को वायुसेना की स्थापना की गई थी इसीलिए हर साल 8 अक्टूबर वायुसेना दिवस मनाया जाता है। देश के स्वतंत्र होने से पहले वायुसेना को रॉयल इंडियन एयर फोर्स (आरआईएएफ) कहा जाता था। 1 अप्रैल 1933 को वायुसेना का पहला दस्ता बना जिसमें 6 आएएफ-ट्रेंड ऑफिसर और 19 हवाई सिपाहियों को शामिल किया गया था। आजादी के बाद वायुसेना के नाम में से "रॉयल" शब्द को हटाकर सिर्फ "इंडियन एयरफोर्स" कर दिया गया था। भारतीय वायुसेना ने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान भी अहम भूमिका निभाई थी।


आजादी से पहले वायु सेना आर्मी के तहत ही काम करती थी। एयर फोर्स को आर्मी से 'आजाद' करने का श्रेय भारतीय वायु सेना के पहले कमांडर इन चीफ, एयर मार्शल सर थॉमस डब्ल्यू एल्महर्स्ट को जाता है। आजादी के बाद सर थॉमस डब्ल्यू एल्महर्स्ट को भारतीय वायु सेना का पहला चीफ, एयर मार्शल बनाया गया था। वह 15 अगस्त 1947 से 22 फरवरी 1950 तक इस पद पर बने रहे थे।  


गीता से लिया गया है आदर्श वाक्य 

भारतीय वायुसेना का आदर्श वाक्य है- 'नभ: स्पृशं दीप्तम'। यह गीता के 11वें अध्याय से लिया गया है। यह महाभारत के युद्ध के दौरान कुरूक्षेत्र में भगवान श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेश का एक अंश है।


वायुसेना ध्वज


वायुसेना ध्वज, वायु सेना निशान से अलग, नीले रंग का है जिसके शुरुआती एक चौथाई भाग में राष्ट्रीय ध्वज बना है और बीच के हिस्से में राष्ट्रीय ध्वज के तीनों रंगों अर्थात्‌ केसरिया, श्वेत और हरे रंग से बना एक वृत्त (गोलाकार आकृति) है। यह ध्वज 1951 में अपनाया गया। 

Oct 2, 2021

 अंतर्राष्ट्रीय पशु दिवस


विश्व पशु कल्याण दिवस एक अन्तराष्ट्रीय दिवस है जोकि प्रतिवर्ष अक्टूबर को मनाया जाता है. यह दिन असीसी के सेंट फ्रांसिस का जन्मदिवस भी है जोकि जानवरों के महान संरक्षक थे. इस दिवस का आयोजन 1931 ईस्वी परिस्थितिविज्ञानशास्रीयों के सम्मलेन में इटली के शहर फ्लोरेंस में शुरू हुआ था. इस दिवस का मूल उद्देश्य विलुप्त हुए प्राणियों की रक्षा करना और मानव से उनके संबंधो को मजबूत करना था. साथ ही पशुओ के कल्याण के सन्दर्भ विश्व पशु कल्याण दिवस का आयोजन करना था.

World Animal Day Theme 2021 : "Forests and Livelihoods: Sustaining People and Planet"

विश्व पशु कल्याण दिवस का उद्देश्य

विश्व पशु कल्याण दिवस का मूल उद्देश्य पशु कल्याण मानकों में सुधार करना, और व्यक्तियों,समूह, और संगठनों  का समर्थन प्राप्त करना और जानवरों के प्रति प्यार प्रकट करना ताकि उनका जीवन सक्षम और बेहतर हो सके. इस कारण से यह दिवस पशु प्रेमी दिवस के रूप में जाना जाता है. यद्यपि यह एक बेहतरीन दिवस विश्व भर के लोगो का जानवरों के प्रति प्यार प्रकट करने का महत्वपूर्ण दिवस है, लेकिन इस दिवस के उजागर होने के पीछे भी कई कारण जिम्मेदार हैं. इन सभी तथ्यों में जानवरों के प्रति प्रकट किये जाने वाले घृणास्पद व्यवहार, आवारा कुत्तों और बिल्ल्लियों के प्रति व्यवहार, उनका अमानवीय व्यापार आदि भी प्रमुख कारण थे. इसके अलावा किसी प्राकृतिक आपदा के समय भी इन जानवरों के प्रति दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता था और उनकी सुरक्षा के प्रति लापरवाही बरती जाती थी.

विश्व पशु कल्याण दिवस समारोह

विश्व पशु कल्याण दिवस वास्तव में एक महत्वपूर्ण दिवस है. यह विविध माध्यमों से हमें कई चीजो को याद दिलाता है जिसमे जानवर हमारे जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि करते हैं. इस दिवस को ढेर सारे दिवसों का आयोजन किया जाता है. अर्थात जैसे विश्व पशु कल्याण अभियान, पशुओं के लिए बचाव आश्रयों का उद्घाटन, और फंड जुटाने से सम्बंधित कार्यक्रमों का आयोजन इत्यादि. इसके अलावा स्कूल और कालेजों में भी वन्य जीवों से जुडी ढेर सारी जानकारियों को टीवी और कंप्यूटर के माध्यम से साझा किया जाता है. इसके अलावा कई संगठनों के द्वारा जानवरों के लिए आश्रय के निर्माण का कार्यक्रम भी को स्वयंसेवको के द्वारा प्रायोजित किया जाता है..

जानवर मनुष्यों के हमेशा से ही सबसे अच्छे दोस्त साबित होते रहे हैं. मनुष्य ने अपनी सभ्यता की शुरुआत से ही जानवरों के साथ बेहतरीन दोस्ती बनाकर रखी और उसी का नतीजा है कि आज जानवर हमारी कई जरूरतों को पूरा कर रहे हैं. लेकिन इन सबके बदले हमने जानवरों को क्या दिया है? उन्हें बेघर कर दिया, उन्हें ही अपना भोजन बना लिया और जो कभी हमारे परम मित्र हुआ करते थे उन्हें अपना परम शत्रु बना लिया है. 

आज इंसान ने अपने भोजन और शौक के लिए कई ऐसे जानवरों को लुप्त होने के कगार तक ला खड़ा किया है जो कभी इस धरती पर बड़ी संख्या में थे. उदाहरण के लिए शार्क और व्हेल को खाने की प्लेट में रखने वाले तथाकथित शौकीनों की वजह से जल के इन प्राणियों की संख्या आज नगण्य हो चुकी है. कुछ ऐसा ही हाल नीलगायों का भी हुआ है.

किताबों व लोक कथाओं में मनुष्य और जानवरों की दोस्ती के कई किस्से मशहूर हैं. जानवर मनुष्य का सबसे अच्छा दोस्त भी माना गया है और इनकी दोस्ती की कई मिसालें दी जाती हैं. लेकिन कुछ वर्षों से जंगली जानवरों ने मानव बस्तियों पर हमला कर मनुष्य को ही शिकार बनाना शुरू कर दिया है. एक जमाने में दोनों अपने-अपने क्षेत्र का उपयोग कर शांतिपूर्वक रह रहे थे. विकास की बयार और आगे निकलने की होड़ में जब मानव ने जानवरों के क्षेत्र में अपना अधिकार जमाने के प्रयास किए तो मामला पेचीदा हुआ. मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया और जंगलों का कटान कर बस्तियां बसाई. इसी जद्दोजहद में जब जंगली जानवरों के रहने के लिए घर नहीं रहा व भोजन तलाशने में दिक्कत हुई तो मजबूरन उन्हें मानवीय बस्तियों का रुख करना पड़ा. यही कारण है कि जानवर हिंसक हुए और बस्तियों पर इनके हमले बढ़े हैं

  Earth Day - 22.04.2023 - KV Chanderi   What is Earth Day? Earth Day  is an annual event dedicated to raising awareness and inspiring actio...